✨"आईना- ए- तहरीर", अपने नाम के अनुरूप सृजनात्मक अभिव्यक्ति का आईना बन कर जीवन के सरकारों से आपको रु-ब-रु कराने के लिए तैयार है l ✨मुख्य संयोजक :- डॉ अनुपमा श्रीवास्तव ✨ब्लॉग प्रबंधक:- गार्गी शुक्ला तुषिता राज आप सभी अपनी रचनाएं नीचे दिए गए मेल पर भेजें:- cauldronhindimagazine@gmail.com धन्यवाद।
शुक्रवार, 23 जुलाई 2021
कविता: प्रथम किरण का उदय
बुधवार, 21 जुलाई 2021
कविता - मैं ही दुखी हूं (एक व्यंग्य)
सोमवार, 25 जनवरी 2021
कविता - मैं और तुम
तुम और मैं
उस सड़क से आते तुम
सामने से आती मैं
अपने बाल संवारते तुम
खुद पर इतराती मैं
धूप पढ़ती तुम्हारे चहरे पर
तुम्हें निहारती मैं
तुम्हें देखकर खुश होती मैं
पर मुस्कुराते तुम
देर से निकलती मैं
पर देर हो जाते तुम
शिक़न आती मेरे माथे पर
और परेशान हो जाते तुम
बेवजह मुस्कुराती मैं
और तनाव से मुक्त हो जाते तुम
सपने देखती मैं
मेरे सपनों में आते तुम
कभी तुम 'मैं' होते
और कभी मैं हो जाती 'तुम'
कविता लिखती मैं
और मेरी कविताओं में आते तुम
घर से निकलती मैं
तो रास्ते में मिल जाते तुम
नजरे मिलाती मैं
तो बात करने से घबराते तुम
बारिश होती मेरे शहर में
और भींग जाते तुम
कभी तुम 'मैं' होते
और कभी 'मैं' हो जाती तुम
©सौन्दर्या 🥀
सोमवार, 7 दिसंबर 2020
कविता - पर्दा
रविवार, 29 नवंबर 2020
कविता - महामारी और मानसिक स्वास्थ्य
बुधवार, 25 नवंबर 2020
कविता - पुस्तकें
मंगलवार, 24 नवंबर 2020
कविता - चाय
आज पेड़ों की खुशी
आज पेड़ों की खुशी निराली है हर तरफ दिख रही हरियाली है पक्षियों में छाई खुशहाली है क्योंकि बारिश लाई खुशियों की प्याली है Priya kaushik Hind...
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सर्वव्यापी महामारी /संगरोध (pandemic/quarantine) दुनिया चुप हो गई है जबकि यह चिल्ला रही है और अंदर से उखड़ रही है। यह एक स्तरित चुप्पी है और...